भोपाल । प्रदेश में बिजली की अधिकतम डिमांड 14,856 मेगावाट पहुंच गई। ये नया रिकॉर्ड है। प्रदेश के बिजली इतिहास में अभी तक इतनी डिमांड नहीं पहुंची थी। पिछले 10 दिनों से बिजली की डिमांड 14 हजार मेगावाट के ऊपर बनी हुई है। सबसे अधिक डिमांड पश्चिम क्षेत्र (इंदौर व उज्जैन संभाग) में 6077 मेगावाट थी। वहीं, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) में 4,752 मेगावाट और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर, सागर व रीवा संभाग) में 4,028 मेगावाट दर्ज हुई।
दावा- बिजली सप्लाई नहीं हुई बाधित
बिजली कंपनियों का दावा है कि अधिक डिमांड के बावजूद कहीं बिजली सप्लाई बाधित नहीं हुई। बिजली कंपनियों के बेहतर प्रबंध और मजबूत सप्लाई नेटवर्क से ये संभव हो पाया। बिजली में ये डिमांड फसलों की सिंचाई के चलते बढ़ी है। पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 3 फरवरी को बिजली की अधिकतम मांग 14555 मेगावाट दर्ज हुई थी।

प्रदेश में यहां से हुई बिजली सप्लाई
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप व जल विद्युत गृहों का उत्पादन अंश 2,718 मेगावाट रहा। इंदिरा सागर-सरदार सरोवर-ओंकारेश्वर जल विद्युत परियोजना का अंश 1,849 मेगावाट रहा। एनटीपीसी व नार्दन रीजन का अंश 3,383 मेगावाट रहा। सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट का अंशदान 1,346 मेगावाट रहा। आईपीपी का अंश 1,778 मेगावाट रहा। बिजली बैंकिंग के तहत दूसरे राज्यों से 1940 मेगावाट मिला। नवकरणीय सहित ऊर्जा के अन्य स्रोतों से 1,843 मेगावाट मिला।

इन कंपनियों की सम्मिलित प्रयास से संभव
बिजली सप्लाई करने में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के कंट्रोल रूम व क्षेत्रीय कार्यालय, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर, पावर जनरेटिंग कंपनी के विद्युत गृहों के साथ मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी और राज्य की पूर्व क्षेत्र, मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कंट्रोल रूम के साथ फील्ड के अभियंताओं की भूमिका रही।