यदि आपको कोई कुत्ता कहता है तो आप उसे भौंकें नहीं बल्कि मुस्कुराएँ। गालियाँ देने वाला स्वयं ही शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा सचमुच कुत्ता बन जाओगे। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको गालियाँ देता है और आप उसे स्वीकार नहीं करते तो वह गालियाँ उसी के पास रह जाती हैं। भगवान महावीर को भी लोगों ने गालियाँ दीं। उन्होंने कहा कि जीवन में शांति पाने के लिए प्रोध पर काबू पाना सीख लो। जिसने जीवन से समझौता करना सीख लिया वह संत हो गया। वर्तमान में जीने के लिए सजग और सावधान रहने की आवश्यकता है।  
तथाकथित आधुनिक सभ्यता एवं पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण कर रही नई पीढ़ी को समझाइश देते हुए मुनिश्री ने कहा कि शादी करना है तो जागते हुए करो। परिजनों की मर्जी को दरकिनार कर घर से भागने की प्रवृत्ति आपके जीवन को अंधकारमय बना सकती है। उन्होंने युवतियों से कहा कि कभी भी घर से भागकर शादी मत करना। विधर्मी से शादी करने पर आपको वह सब भी करना पड़ सकता है जिसकी कल्पना आपने कभी न की होगी। उन्होंने कहा कि फिल्म के तीन घन्टे तथा जीवन में काफी अंतर होता है। वास्तु शास्त्र, ज्योतिष व धर्म के नाम पर पाखण्ड एवं ग्लैमर की चकाचौंध को लेकर श्रद्धालुओं को खबरदार करते हुए मुनिश्री ने कहा कि जिसके भाग्य में जो लिखा है वही मिलेगा और परेशान होने से कुछ अतिरिक्त प्राप्त नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च सत्ता ईश्वर ही होता है और वह यदि आपसे नाराज है तो दुनिया की कोई ताकत या वास्तु शास्त्र आदि आपकी मदद नहीं कर सकता।