दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली दंगा मामलों में पैरवी के लिए दिल्ली पुलिस के वकीलों के पैनल को खारिज करने के आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के फैसले को पलट दिया। दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को उपराज्यपाल के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सुझाए गए वकील रखना सही नहीं है। हम सभी दोषियों के लिए सजा चाहते हैं, लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

दिल्ली सरकार की ओर से गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इस बारे में बताया गया है। सरकार ने कहा कि संविधान के मुताबिक वह उपराज्यपाल के आदेश को लागू करने के लिए बाध्य हैं।

बयान में कहा गया कि है उपराज्यपाल ने गृह विभाग को वकीलों के पैनल के संबंध में दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी देने का निर्देश दिया है। हालांकि, एलजी ऑफिस ने बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक में दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तावित वकीलों के पैनल को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इससे उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा संबंधी मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष सुनवाई में मदद नहीं मिलेगी। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में दंगा मामलों की चल रही सुनवाई में पैरवी के लिए वकीलों को नियुक्त करने के संबंध में दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 

दिल्ली दंगे में 53 लोगों की हुई थी मौत

गौरतलब है कि नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया।

इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी।